अर्निंग पर शेयर (EPS)क्या होता है |Why EPS is Important |

दोस्तों अगर आप शेयर बाजार में इन्वेस्टमेंट करने की सोच रहे हैं तो मैं उम्मीद करता हूं आप EPS के बारे मे जरूर जानते होंगे लेकिन अगर आप EPS Ratio के बारे मे नहीं जानते या आप अभी शेयर मार्केट में नए हैं तो ये पोस्ट आपके लिए ही है जिसमें आप जानेंगे अर्निंग पर शेयर (EPS)क्या होता है |Why EPS is Important |

नमस्कार दोस्तों!!!!!

मैं राज आप सभी का मेरे इस नए ब्लॉग पोस्ट पर हार्दिक स्वागत करता हूं और उम्मीद करता हूं आज आप EPS के बारे मे काफी कुछ सीख कर यहां से जाओगे |

EPS होता क्या है :–

EPS का पूरा नाम Earning Per Share होता है और जैसा की ये नाम से ही पूरा अर्थ बता देता है कि EPS हमें एक शेयर के पीछे की कमाई को बताता हैं। EPS रेश्यो हमें यह भी बताता हैं की कोई कंपनी एक निश्चित समय के दौरान एक कॉमन शेयर पर कितना लाभ कमा रही हैं।

उदाहरण:-

मान लो रिलायंस इंडस्ट्रीज का नेट प्रॉफिट 2023 में 100 cr है और 2023 में रिलायंस ने 5cr रुपये अपने शेयर धारकों को डिविडेंड बांट दिया है और कंपनी की औसत outstanding कॉमन शेयर 10cr है. तो रिलायंस का EPS 2023 में 9.5 रूपए हो जायगा क्योंकि 100cr – 5cr = 9.5 रुपए Preferred Dividends = 5cr

Average Outstanding Common Shares = 10cr

EPS = (100cr – 5cr) ÷ 10cr = 9.5

मगर एक बात जरूर ध्यान में रखें कि प्रत्येक कंपनी Dividends नहीं देती है ऐसे में हमें EPS निकालने के लिए कंपनी के नेट प्रॉफिट को Average Number Of Share Outstanding से से डिवाइड करना पड़ता है जिससे EPS निकल कर आ जाता है|

किसी कंपनी के EPS तथा Outstanding Shares में आपसी उल्टा सम्बन्ध होता है. मतलब की जब भी कंपनी के Outstanding Shares बढेंगे तो EPS घटेगा. जब Outstanding Shares घटेंगे तो EPS बढेगा.


कई सारी कंपनिया शेयर का बायबैक भी करती है जिससे मार्केट के total Outstanding Shares कम कर दिए जाते है और फिर EPS बढ़ जाता है|

EPS कितने प्रकार का होता है :–

EPS मुख्यतः 2 प्रकार के होते हैं :–

Basic Earning Per Share :-


बेसिक EPS से हमें यह जानने को मिलता है कि किसी कंपनी का 01 शेयर, शेयर मार्किट में कितनी कमाई करके दे रहा है|

Diluted EPS क्या होता हैं :–


Diluted EPS एक खास तरह का EPS माना जाता है जोकि हमें कंपनी की Income statement में देखने को मिलता है|

कई बार कंपनिया जो convertibles share जारी करती है उन्हें common share में बदल दिया जाता है.
उदाहरण के लिए Convertible bonds & Debentures , Stock warrants Employee स्टॉक ऑप्शन इत्यादि |

Diluted EPS फार्मूला –

Diluted EPS = ( नेट इंकम − Preferred Dividends ) ÷ End-of-Period Common Shares Outstanding + Convertible Shares )

शायद ये फार्मूला आपको समझ ना आया हो तो चलो इसे एक उदाहरण से समझते हैं:–

मान लो :–

रिलायंस का नेट प्रॉफिट – ₹100000
Preferred Dividend –₹20000
कॉमन शेयर्स – 2000
Convertible Shares – 400
Diluted EPS = (₹ 100000 – ₹20000) ÷ (2000+400) = 6.6

आप सीख रहे हैं अर्निंग पर शेयर (EPS)क्या होता है |Why EPS is Important |

EPS का क्या उपयोग है :-

EPS के यूँ तो कई फायदे या उपयोग होते हैं लेकिन कुछ महत्वपूर्ण निम्नलिखित हैं जो हमें EPS की वास्तविक जरूरत को बताते हैं :–

  • EPS किसी भी कंपनी की 01 शेयर के पीछे की कमाई को बताता है.
  • कई निवेशकों का कहना है की high EPS बाले शेयर को अपने पोर्टफोलियो में शामिल करना चाहिए |
  • कंपनी का PE Ratio निकालने में भी EPS का प्रयोग किया जाता है|
  • कंपनी का बिजनेस किस हिसाब से ग्रो कर रहा है ये भी हम EPS की मदद से जान सकते है|
EPS से हमें किसी भी कम्पनी के बारे में क्या पता चलता है ?
  1. EPS हमें बताता है कि एक xyz कम्पनी अपने शेयरधारकों को उनके द्वारा खरीदे गये हर एक शेयर पर एक वित्तीय वर्ष में कितना लाभ कमा कर दे रही है |
  2. EPS हमें किसी कम्पनी कि अर्निंग पावर बताता है यानी की जिस कम्पनी का EPS जितना ज्यादा होगा उस कम्पनी कि अर्निंग पावर भी उतनी ही ज्यादा होगी |
  3. शेयर बाजार में जो निवेशक डिविडेंड  के जरिए एक रेगुलर इंकम पाना चाहते है वो एक कम्पनी के EPS के माध्यम से यह पता लगा सकते हैं कि वो कम्पनी उन्हें कितना ज्यादा डिविडेंड दे सकती है यानी कि अगर एक कम्पनी साल में अपने निवेशकों को उनकी इन्वेस्टमेंट पर 100 से 200 रूपये का डिविडेंड दे रही है तो EPS से उन निवेशकों को यह पता लग सकता है कि वो कम्पनी उनकी इन्वेस्टमेंट पर ओर कितना ज्यादा डिविडेंड  दे सकती है |
EPS की कमियाँ :–
  • EPS कंपनी के आकार को ध्यान में नहीं रखता यानी कोई कंपनी कितना डिविडेंड दे सकती है या कंपनी के पास कितना Capital है |
  • EPS बिजनेस के फैलाव को ध्यान में नहीं रखता है जैसे:–भौगोलिक, आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता, ग्राहकों पर निर्भरता….
  • यह एक स्थिर आंकड़ा है जो पुराना डाटा भी कई बार दिखा देता है |
  • सिर्फ EPS के माध्यम से आप किसी कंपनी को judge नहीं कर सकते |
  • कई बार EPS negative रहता है तो निवेशको का विश्वास कम हो जाता है |

अगर आप भी motivational Speech को सुनना पसंद करते हैं तो यूट्यूब पर इन्हें जरूर देखें :–

Sandeep Maheshwari

Sonu Sharma

EPS की फुल फॉर्म या पूरा नाम क्या है?

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शेयर मार्केट में सबसे बड़ा आदमी कौन है?

विश्व मे वारेन बफेट और भारत में राधाकृष्ण dmaani

PE Ratio कितना होना चाहिए?

20 या उससे अधिक का PE Ratio बेहतर माना जाता है |

भारत में कुल कितने शेयर मार्केट है?

SEBI द्वारा लिस्टेड भारत में 23 स्टॉक एक्सचेंज हैं जिनमे से 02 राष्ट्रीय और 21 स्थानीय स्टॉक एक्सचेंज हैं |

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