शेयर मार्केट में प्रयोग होने वाली शब्दावली top 40

अगर आप शेयर बाजार में नए हैं तो आपके मन मे हमेशा से स्टॉक मार्केट में प्रयोग होने वाले शब्दों को लेकर कुछ संदेह होगा जिन्हें आप जानना चाहते हैं अगर आप भी उनमे से हैं तो यह पोस्ट आपके लिए ही है इसमे आप जानेंगे शेयर मार्केट में प्रयोग होने वाली शब्दावली:Top 40

शेयर मार्केट में प्रयोग होने वाली शब्दावली top 40
Warren Buffet The billionare

नमस्कार दोस्तों!!!

मैं आपका राज ठाकुर एक बार फिर से आपका मेरे इस ब्लॉग पर हार्दिक अभिनंदन करता हूं… उम्मीद करता हूं कि आप अपने जिस प्रश्न का जवाब ढूँढने आए हैं वो आपको जरूर मिलेगा…

तो चलिए शुरू करते हैं शेयर बाजार से संबधित उन शब्दों को जानना जिनको जाने बिना आप शेयर बाजार में ना ही सफल ट्रेडर बन सकते हो ना ही एक सफल इनवेस्टर…

शेयर मार्केट में प्रयोग होने वाली शब्दावली top 40

शेयर – Share

शेयर का मतलब होता है “हिस्सा” यानि की किसी कंपनी के स्वामित्व का एक हिस्सा जो की एक शेयर (one share) होता हैं। इस प्रकार एक शेयर कंपनी की पूंजी का सबसे छोटा भाग होता हैं।

परिभाषा के तौर पर शेयर का अर्थ होता है, “किसी कंपनी की कुल पूंजी को कई सामान हिस्सों में बांट देने पर जो पूंजी का सबसे छोटा हिस्सा बनता है उस हिस्से को शेयर कहा जाता है।”

किसी भी कंपनी के शेयर आप स्टॉक ब्रोकर के माध्यम से ख़रीद सकते हैं।


[2] डिविडेंड – Dividend

Dividend वह होता हैं जो कंपनी अपने नेट प्रॉफिट में से अपने शेयरधारकों (shareholders) को बांटती हैं।

कंपनी अपने शेयर होल्डर्स को कंपनी में निवेश करने और विश्वास जताने के कारण उन्हें भी कंपनी के लाभ में से कुछ हिस्सा रिवॉर्ड के रूप में देती हैं।

डिविडेंड सीधा शेयर धारक के बैंक अकाउंट में क्रेडिट किया जाता है |

[3] बोनस शेयर – Bonus Share

जब किसी कम्पनी द्वारा अपने अर्जित लाभों में से बनाये गए रिजर्व को शेयर्स के रूप में वर्तमान शेयर होल्डरों के मध्य आनुपातिक रूप से बाँट दिया जाता हैं तो उसे बोनस शेयर कहते हैं।

उदाहरण के लिए अगर कोई कंपनी ने 2:1 में बोनस की घोषणा की हैं तो प्रत्येक शेयरहोल्डर जिसके पास एक शेयर हैं उसे दो अतिरिक्त शेयर मिलेंगे।

बोनस शेयर, डिविडेंड के विकल्प के रूप में दिए जाते हैं।

[4] बिड प्राइस – Bid Price

Bid Price किसी शेयर की वह प्राइस होती है जिस पर कोई भी Buyer उस शेयर को खरीदने के लिए तैयार बैठा हो।

जैसे की आपको SBI बैंक का एक शेयर ₹500 में खरीदना हैं और आप इस मूल्य पर अपना आर्डर प्लेस करते हैं। आपकी ये ₹500 की प्राइस बिड प्राइस कहलाएगी।

[5] आस्क प्राइस – Ask Price

Ask Price किसी शेयर की वह Price होती है जिस पर कोई भी Seller उस शेयर को बेचने के लिए तैयार बैठा हो।

[6] स्टॉक स्प्लिट – Stock Split

शेयर स्प्लिट किसी कंपनी के स्टॉक्स के विभाजन की प्रक्रिया है। स्टॉक स्प्लिट एक कॉर्पोरेट एक्शन होता है जिसमें कंपनियां अपने स्टॉक्स को एक निश्चित अनुपात में विभाजित कर देती है।

स्टॉक स्प्लिट के अनुपात में उस कंपनी के शेयर के टुकड़े हो जाते हैं और प्रत्येक टुकड़ा एक नया शेयर बन जाता है। स्टॉक स्प्लिट होने की वजह से कंपनी के शेयर मार्केट में बढ़ (increase) जाते है।

इसके साथ ही कंपनी की शेयर प्राइस और फेस वैल्यू उसी अनुपात में कम हो जाते हैं जिसमें स्टॉक स्प्लिट होता हैं।

[7] स्प्रेड – Spread

किसी शेयर की Bid Price और Ask Price के बीच के अंतर को स्प्रेड कहते हैं।

[8] बेयर मार्केट – Bear Market

बेयर मार्केट में मंदी का दौर रहता हैं। बेयर मार्केट में निवेशक मूल्यों में गिरावट की उम्मीद करते हैं।

[9] बुल मार्केट – Bull Market

बुल मार्केट में स्टॉक मार्केट में तेजी रहती हैं। बुल मार्केट में निवेशक स्टॉक प्राइस के बढ़ने की उम्मीद करते हैं।

[10] लिमिट ऑर्डर – Limit Order

लिमिट ऑर्डर एक ऐसा ऑर्डर होता हैं, जिसमें Buy या Sell का ऑर्डर एक निश्चित प्राइस पर लगाया जाता हैं। जब ये प्राइस हिट होती हैं तब आपका ऑर्डर लागू हो जाता हैं।

[11] मार्केट ऑर्डर – Market Order

मार्केट ऑर्डर में आप जो भी सौदा लगाते हैं वो तुरंत Current Market Price पर एक्सीक्यूट हो जाता हैं।

[12] MIS या इंट्राडे ऑर्डर – MIS or Intraday Order

MIS का मतलब Margin Intraday Square-Off होता हैं। जब आप किसी शेयर में किसी एक ट्रेडिंग दिवस में होने वाली उठा-पटक का फ़ायदा उठाना चाहते हैं तो आपको MIS या इंट्राडे ऑर्डर का चुनाव करना होता हैं।

इस प्रकार के ऑर्डर में आपको शेयर्स की वास्तविक डिलीवरी नहीं मिलती।

[13] स्टॉप लॉस – Stop Loss

स्टॉप लॉस किसी शेयर का वह Price Point होता हैं, जहां पर कोई ट्रेडर या इन्वेस्टर अपना Loss Book करके शेयर से निकलने के लिए तैयार बैठे हो।

शेयर मार्केट में नुकसान को कंट्रोल करने के लिए Stop Loss का इस्तेमाल किया जाता हैं।

[14] CNC या डिलीवरी ऑर्डर – CNC or Delivery Order

CNC की फुल फॉर्म Cash And Carry होता हैं। CNC या डिलीवरी के सौदें तब किये जाते हैं जब आप शेयर्स की वास्तविक डिलीवरी उठाते हैं।

लॉन्ग टर्म के लिए शेयर होल्ड करने के लिए CNC या डिलीवरी विकल्प का चुनाव किया जाता हैं।

[15] शॉर्ट सेल – Short Selling

शेयर मार्केट में प्रयोग होने वाले शब्द में शॉर्ट सेल्लिंग काफी महत्वपूर्ण हैं।

सामान्य ट्रेडिंग में हम पहले शेयर खरीदकर बाद में बेचते हैं। परन्तु Short Sell में शेयर पहले बेचे जाते हैं और बाद में ख़रीदे जाते हैं।

[16] ब्रोकर – Broker

ब्रोकर Buyers और Sellers को मिलाने का काम करता हैं। इस प्रकार एक स्टॉक ब्रोकर स्टॉक एक्सचेंज और इन्वेस्टर के मध्य एक मध्यस्थ का काम करता हैं।

Broker के Platform का उपयोग करके आप शेयर्स खरीद और बेच सकते हैं।

इस प्रकार Short Selling में निवेशक शेयर की प्राइस में होने वाली गिरावट का फायदा उठाने के लिए शेयर्स को ब्रोकर से उधार लेकर बेच देता हैं।

स्टॉक का possession नहीं होने के बावजूद स्टॉक को बेच देने के कारण इसे Short करना कहा जाता हैं।

स्टॉक की प्राइस नीचे आते ही ट्रेडर स्टॉक को वापस खरीद लेता हैं। इस प्रकार वह अपनी पोजीशन को square off कर लेता हैं।

Selling Price और Buying Price के बीच का अन्तर आपका Profit/Loss होता हैं।

[17] स्टॉक एक्सचेंज – Stock Exchange

स्टॉक एक्सचेंज ऐसी जगह होती हैं, जहां सभी कंपनिया Listed होती हैं। सभी स्टॉक ब्रोकर Stock Exchange के मेंबर होते हैं। वर्तमान में भारत में NSE और BSE दो मुख्य स्टॉक एक्सचेंज हैं।

[18] डीमैट अकाउंट – Demat Account

यदि आप किसी कंपनी के शेयर ख़रीदते हैं तो आपको उन्हें होल्ड करने के लिए डीमैट अकाउंट की जरुरत होगी। डीमैट अकाउंट बिलकुल आपके बैंक आकउंट की तरह कार्य करता हैं।

[19] ट्रेडिंग अकाउंट – Trading Account

शेयर्स को Buy और Sell करने के लिए Trading Account आवश्यक होता हैं। ट्रेडिंग अकाउंट को किसी स्टॉक ब्रोकर के पास खुलवाया जाता हैं।

आप पढ़ रहे हैं शेयर मार्केट में प्रयोग होने वाली शब्दावली top 40 के बारे मे:-

[20] सेंसेक्स

सेंसेक्स भारतीय स्टॉक मार्केट का एक सूचकांक (Index) हैं। Sensex बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्टेड सभी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता हैं।

सेंसेक्स BSE की टॉप 30 कंपनियों से मिलकर बना होता हैं। ये 30 कंपनिया बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होती हैं जो बाज़ार पूंजीकरण (Market Capitalization) के आधार पर सबसे बड़ी कंपनिया होती हैं।

[21] निफ़्टी 50

निफ़्टी 50 भी एक इंडेक्स होता हैं, जो NSE (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) पर लिस्टेड कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता हैं।

निफ़्टी 50 NSE की मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर 50 सबसे बड़ी कंपनियों से मिलकर बना होता हैं।

अगर सेंसेक्स की इन 30 कंपनियों का मूल्य बढ़ता हैं तो सेंसेक्स भी ऊपर ओर चढ़ता हैं। वैसे ही सेंसेक्स के शेयर्स के मूल्य में गिरावट आने से सेंसेक्स के मूल्य में भी गिरावट देखी जाती हैं।

[22] सेबी – SEBI

SEBI यानि की Securities Exchange Board of India. सेबी भारत में स्टॉक मार्केट का नियामक (regulator) हैं।

जैसे बैंकों के लिए रेगुलेटर RBI होता हैं वैसे ही शेयर मार्केट में सेबी होता हैं।

[23] वोलेटिलिटी – Volatility

वोलिटिलिटी का मतलब शेयर की कीमतों में उतार-चढ़ाव की सीमा से हैं। ट्रेडिंग सेशन के दौरान हाई वोलिटिलिटी स्टॉक में असामान्य हाई और लो को देखा जाता हैं।

जबकि कम वोलेटाइल स्टॉक में कम उतार-चढ़ाव होता हैं।

इस पोस्ट में आप जानेंगे स्टॉक मार्केट से जुड़े महत्वपूर्ण शब्द जैसे स्टॉक,डिविडेंड,NSE,BSE,IPO,Nifty 50,sensex,ऑप्शन ट्रेडिंग जैसी 40 शब्दावली

[24] मार्जिन – Margin

मार्जिन एक उधार की तरह होता हैं जो स्टॉक ब्रोकर के द्वारा प्रोवाइड करवाया जाता हैं। मार्जिन का उपयोग करके शेयर को ख़रीदा और बेचा जाता हैं।

उदाहरण के लिए आपके पास ₹100 हैं और आपका ब्रोकर आपको इस पर कुल ₹200 पर ट्रेडिंग करने की अनुमति देता हैं तो यहाँ ऊपर वाले ₹100 मार्जिन के होंगे।


[25] BTST – Buy Today Sell Tomorrow Trading

किसी शेयर को आज खरीदकर कल बेच देना BTST (Buy Today Sell Tomorrow Trading) कहलाता हैं।

[26] FII

FII यानि की Foreign Institutional Investors. जब विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) बाजार में निवेश करते हैं तो बाजार की चाल बहुत अधिक तेज होती हैं, वही जब यह बाजार से पैसा निकालते हैं तो बाजार में अत्यधिक गिरावट आ सकती हैं।

[27] आईपीओ – Initial Public Offering

IPO की प्रक्रिया द्वारा एक प्राइवेट कंपनी या कॉर्पोरेशन अपना कुछ हिस्सा बेचकर पब्लिक कंपनी (सार्वजनिक कंपनी) बन जाती हैं।

किसी कंपनी का IPO बाजार में आने से निवेशकों को उनके शेयर्स खरीदकर उस कंपनी के व्यापार में भागीदार बनने का सुनहरा अवसर होता हैं।

आईपीओ के माध्यम से उस कंपनी के शेयर्स स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होते हैं।

[28] वार्षिक विवरण – Annual Report

एक एनुअल रिपोर्ट किसी कंपनी का फाइनेंशियल इवैल्यूएशन (Financial Evaluation) होता हैं। एनुअल रिपोर्ट में कंपनी की फाइनेंशियल स्थिति और संचालन की रिपोर्ट मिलती है।

एनुअल रिपोर्ट किसी एक निर्धारित वित्तीय वर्ष में कंपनी के प्रदर्शन को दर्शाती हैं।


इसमें कंपनी के मुख्य व्यक्तियों के बारे में, कंपनी की गतिविधियों के बारे में, कंपनी के वित्तीय परिणाम, आगामी प्रोजेक्ट्स, ऑडिट रिपोर्ट, बैलेंस शीट, लाभ-हानि का लेखा-जोखा आदि शामिल होते हैं।

[29] बाजार पूँजीकरण – Market Capitalization

किसी कंपनी के द्वारा जारी किए गए कुल शेयरों की बाजार कीमत उस कंपनी का ‘मार्केट कैपिटलाइजेशन’ कहलाता हैं।

[30] NSE – National Stock Exchange

NSE भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज हैं। स्टॉक एक्सचेंज पर कंपनियां लिस्टेड होती हैं।

[31] इनसाइडर ट्रेडिंग – Insider Trading

इनसाइडर ट्रेडिंग एक अवैध कार्य होता हैं। जब किसी व्यक्ति के पास किसी कम्पनी की गुप्त सूचनाएँ रहती हैं तो इस प्रकार वह भारी मात्रा में शेयरों का क्रय-विक्रय करके लाभ कमा सकता हैं। इस प्रकार की ट्रेडिंग को इनसाइडर ट्रेडिंग कहते हैं

[32] BSE – Bombay Stock Exchange

BSE भारत का दूसरा सबसे बड़ा और सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज हैं, जहां पर कंपनियां लिस्टेड हैं|

[33] स्विंग ट्रेडिंग – Swing Trading

स्विंग ट्रेडिंग, एक्टिव ट्रेडिंग का एक प्रसिद्ध तरीका हैं, जिसमें किसी शेयर को एक से अधिक दिनों या दो सप्ताह के के लिए रखा जाता हैं।

स्विंग ट्रेडिंग में पोजीशन को कम से कम रात भर के लिए रखा जाता हैं, क्योंकि इसमें पोजीशन को इंट्राडे ट्रेडिंग के समान उसी दिन स्क्वायर ऑफ नहीं किया जा जाता।

स्विंग ट्रेडर्स, इंट्राडे ट्रेडर्स के समान सिद्धांतों पर काम करते हैं, क्योंकि इसका उद्देश्य शॉर्ट-टर्म प्राइस मूवमेंट से मुनाफा कमाना होता हैं।

[34] पोज़िशनल ट्रेडिंग – Positional Trading

Position Trading में किसी स्टॉक को कुछ महीनों से लेकर 1 साल के अंदर बेच दिया जाता हैं।

[35] पेनी स्टॉक – Penny Stock

आमतौर पर पैनी स्टॉक वे स्टॉक होते हैं जिनकी कीमत ₹ 10 से कम होती हैं। इस प्रकार के शेयर्स में हाई रिस्क के साथ हाई रिटर्न देने की क्षमता होती है

[36] गिरवी शेयर – Pledged Share

शेयर एक वित्तीय सिक्योरिटी होती हैं जिस पर प्रमोटर (Promoter) या निवेशक (investor) का पूर्ण अधिकार होता हैं।

यदि प्रमोटर्स को कंपनी के सञ्चालन के लिए धन की आवश्यकता हैं तो वे शेयरों को बैंकों के पास धन के लिए गिरवी रख सकते है, और इसके बदले उधार ले सकता हैं।


[37] DP – Depository Participate

डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट (DP), स्टॉक एक्सचेंज और निवेशक के बीच वह कड़ी होती हैं, जो शेयर्स या सिक्योरिटी को संभाल कर इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखता हैं।

जैसे की अगर आपका डीमैट अकाउंट Upstox या Zerodha में हैं तो आपके शेयर्स CDSL में जमा रहेंगे।

भारत में NSDL (National Securities Depository)और CDSL (Central Depository Services India Ltd) दो डिपॉजिटरी है।



[38] 52-Week Low

पिछले 52 सप्ताह के भीतर किसी स्टॉक सबसे कम कीमत को 52 week low कहा जाता है

[39] 52-Week High

पिछले 52 हफ्तों के भीतर किसी स्टॉक की उच्चतम कीमत (price) को 52 week high कहा जाता हैं।

[40] फोरेक्स मार्केट – Forex Market

Forex Market वह मार्केट होता हैं जहां Currency (जैसे की रुपये, डॉलर, पाउंड, यूरो) को ख़रीदा और बेचा जाता हैं।

मैं उम्मीद करता हूं कि आप इस पोस्ट से काफी कुछ सीखें होंगे

अगर आपको यह पोस्ट:-शेयर मार्केट में प्रयोग होने वाली शब्दावली top 40 के बारे मे जानकारी अच्छी लगी हो तो कृपया कमेन्ट करके जरूर बताएं |

शेयर मार्केट का किंग कौन है?

विश्व मे वारेन बफेट और भारत मे राकेश झुनझुनवाला को शेयर बाजार का king कहा जाता है |

मोबाइल से शेयर कैसे ख़रीदे

आप अपने फोन पर कोई ब्रोकर app डाउनलोड कर लें इसके बाद आप आसानी से शेयर खरीद सकेंगे

शेयर बाजार में कम से कम कितना पैसा लगा सकते हैं

इसकी कोई भी सीमा तय नहीं है आप 100 रुपये से भी शुरुआत कर सकते हैं |

दुनिया का सबसे महंगा शेयर किसका है?

बर्कशायर हेथवे इंक जोकि वारेन बफेट की कंपनी है उसके एक शेयर की कीमत 3 करोड़ से भी ज्यादा है |

शेयर बेचने पर कितना चार्ज लगता है?

शेयरों की बिक्री पर सेलर को 0.025 फीसदी टैक्स देना पड़ता है. यह टैक्स शेयरों के बिक्री मूल्य पर देना पड़ता है.

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