शॉर्ट सेलिंग क्या होती है |Why Short Selling is Not Important for Begginers|

दोस्तों आज हम शेयर मार्केट के एक ऐसे विषय पर ध्यान केंद्रित करने जा रहे हैं जहां आप शेयर प्राइस के गिरने पर मुनाफा कमाने वाले हैं तो चलिए इस दिलचस्प विषय के बारे में जानते हैं शॉर्ट सेलिंग क्या होती है |Why Short Selling is Not Important for Begginers|

नमस्कार दोस्तों!!!

मैं Raaz Thakur आप सभी का एक बार फिर से स्वागत करता हूं शेयर मार्केट की इस सीरीज के नये ब्लॉग पर यकीन मानिये ये ब्लॉग सबसे दिलचस्प ब्लॉग्स में से एक होने वाला है |

SHORT SELLING IS NOT FOR EVERYONE IT BRINGS BIG RISK WITH HIGH PROFIT

Writerraaz.com
शॉर्ट सेलिंग की शुरुआत कब और किसने की

1609 में एक डच व्यापारी आइजैक ले मायेर द्वारा|

शॉर्ट सेलिंग होती क्या है :–

शॉर्ट सेलिंग को साधारण भाषा मे समझे तो इसमे मार्केट के विपरीत कार्यवाही की जाती है यानी जब मार्केट प्राइस गिरने की स्थिति बनती है तो इसमे Trader शेयर खरीद लेता है और जब उसे लगता है मार्केट उपर चढ़ने वाला है तो वो शेयर बेच देता है |

क्या भारत मे शॉर्ट सेलिंग बैन है :–

भारत ने शॉर्ट सेलिंग से होने वाले प्रभावों को देखते हुए 2001 से 2008 तक और फिर 2020 में शॉर्ट सेलिंग को भारत में प्रतिबंधित कर दिया |

शॉर्ट सेलिंग कितने प्रकार की होती है :–
शॉर्ट सेलिंग दो तरह की होती है :–
1.इंट्रा-डे शॉर्ट सेलिंग
2.शॉर्ट टर्म शॉर्ट सेलिंग

1. इंट्रा-डे शॉर्ट सेलिंग :– 

शेयर बाजार में अधिकतर शार्ट सेलिंग इंट्रा-डे ही की जाती है। इंट्रा-डे शॉर्ट सेलिंग करने के लिए हमें MIS अकाउंट की जरूरत पड़ती है या दूसरे शब्दों में कहें तो जिस अकाउंट से हम इंट्राडे शार्ट सेल्लिंग करते हैं उसे MIS अकाउंट कहते है।

MIS अकाउंट से ट्रेड का समय सुबह 9.15 से शाम के 3.30 के बीच में होता है। इसी समय के बीच में ही शेयर को सेल करने buy भी करना होता है कुछ ब्रोकर हमे 3.10 p.m. का समय देते हैं position Square-Off के लिए जबकि कुछ 3.20 p.m. तक का समय देते है जैसे Zerodha इत्यादि।

2. शार्ट–टर्म शॉर्ट सेलिंग :– 

शार्ट टर्म शॉर्ट सेलिंग में शेयर होल्डर लम्बे समय तक किसी कंपनी के शेयर को खरीद कर रखते है वो उन लोगों को अपने शेयर उधार देते है जो शार्ट–सेल्लिंग करते है और इसके बदले में कुछ कमीशन वसूल करते है।

चलिए इसे एक उदाहरण के साथ समझते हैं मान लो संजू नाम का एक शेयरहोल्डर रिलायंस कंपनी के शेयर लम्बे समय तक खरीदता है और वह इन शेयर को कम से कम 10 साल रखना चाहता है।लेकिन इसी बीच रिलायंस कम्पनी के बारे में मार्केट में कोई बुरी खबर आती है।

जिससे दीप नाम के व्यक्ति को लगता है की अब रिलायंस के शेयर की कीमत घटने वाली है। इसीलिए वह संजू को बोलता है की अगर वह अपने शेयर कुछ महीनो के लिए उसे सेल करने के लिए उधार दे दे तो वह संजू को उसका कमिशन देगा।

और निश्चित समय के बाद वह संजू के शेयर को खरीद के सारे शेयर उसे वापिस लौटा देगा। इस प्रकार यहाँ दीप शार्ट टर्म शार्ट सेल्लिंग करेगा। इससे दोनों फायदा कमा सकते हैं है |इसी को ही शार्ट–टर्म शॉर्ट – सेलिंग कहा जाता है।

इस पोस्ट में आप पढ़ रहे हैं शॉर्ट सेलिंग क्या होती है |Why Short Selling is Not Important for Begginers|

शॉर्ट सेलिंग के फ़ायदे :–
  • शॉर्ट सेलिंग का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप इसमे गिरते मार्केट या गिरते हुए स्टॉक प्राइस से भी मुनाफा कमा सकते हैं।
  • शॉर्ट सेलिंग स्टॉक मार्केट को स्थिरता और तरलता प्रदान करती है।
  • शॉर्ट सेलिंग आपकी इन्वेस्टमेंट में मार्केट की अस्थिरता को शॉर्ट सेल hedging के माध्यम से सुरक्षा देता हैं।
  • शेयर मार्केट में कहा जाता है कि शॉर्ट सेलिंग से स्टॉक की कीमत में सुधार देखने को मिलता है।
  • शॉर्ट सेलिंग से आप मार्जिन से भी अपनी पोजीशन बना सकते हैं।
  • लोंग और शॉर्ट पोजीशन के आपसी तालमेल से ही स्टॉक की अस्थिर प्रवृत्ति में कमी आती है।
शॉर्ट सेलिंग के नुकसान :–
  • इंट्रा-डे शॉर्ट सेलिंग में अगर शेयर के ऊपर अपर सर्किट लग जाये और अगले कुछ दिनों तक अपर सर्किट जारी रहे तो ट्रेडर के लिए ये एक बुरे स्वप्न जैसा हो सकता है।
  • ज्यादा शॉर्ट सेलिंग किसी भी स्टॉक की अस्थिरता को बढ़ा सकती है।
  • शॉर्ट सेलिंग में नुकसान की कोई निश्चित सीमा नहीं हैं।क्योंकि यदि स्टॉक का प्राइस घटने के जगह बढ़ जाता है तो इनवेस्टर को बहुत बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है।
  • शॉर्ट सेलिंग को स्टॉक मार्केट में एक धोखाधड़ी के रूप मे भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • शॉर्ट सेलिंग में डिफाल्टर होने पर भारी पेनल्टी चुकानी पड़ती है।

निष्कर्ष :–

शॉर्ट सेलिंग उन लोगों के लिए एक बेहतर ऑप्शन है जो शेयर मार्केट की फील्ड में लंबे समय से लगे हैं क्योंकि शॉर्ट सेलिंग को समझना एक नए ट्रेडर के बस की बात बिल्कुल नहीं है |

इसलिए यदि आप एक निवेशक है तो मैं आपको बताना चाहूँगा कि शॉर्ट सेलिंग में तभी घुसे जब आप शेयर मार्केट के पके खिलाड़ी बन जाओ |

शेयर मार्केट का पूरा कोर्स करने के लिए आप इन्हें फॉलो कर सकते हैं :–

Pushkar Raj Thakur

CA Rachna Ranade

शेयर मार्केट का दूसरा नाम क्या है?

स्टॉक एक्सचेंज |

भारत में नंबर 1 शेयर बाजार कौन है?

बंबई स्टॉक एक्सचेंज। साल 1875 मे स्थापना हुई | और इसकी पहुंच भारत के 417 शहरों तक है।

NSE का मतलब क्या है?

नैशनल स्टॉक एक्सचेंज |

शेयर बाजार में शॉर्ट सेलिंग क्या है?

शॉर्ट सेलिंग यानी जब प्राइस गिरे तो शेयर खरीदना और जब प्राइस बढ़े तो शेयर बेच देना |

भारत में डायरेक्ट सेलिंग कंपनी कितनी है

462 रजिस्टर्ड कम्पनियां है |

मोबाइल की सबसे बड़ी कंपनी कौन सी है?

Apple विश्व की सबसे बड़ी मोबाइल कंपनी है |

भारत में कितने लोग शेयर मार्केट में पैसा लगाते हैं?

4-6%
जबकि अमेरिका मे यह आंकड़ा 50-60% है |

Related Post :–

Equity Fund क्या होता है |Why it is Important for traders

ऑप्शन ट्रेडिंग क्या होती है |Why Option Trading is Important |

Top 50 Interesting Facts About Share Market In Hindi

Top Small cap stocks for long term in Hindi

Best Perimeter For Analyzing a Compnay In Hindi|

SEBI (Security And Exchange Board Of India) In Hindi

Demat Account क्या होता है?

Leave a Comment

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Scroll to Top